*लूट कर मासूम की आबरूं,*
*जालिमो तुम्हे नींद कैसे आयी होगी।*
*तुमने तड़पा कर उस खिलते फूल को,*
*अपनी बेटियों से कैसे नजरें मिलाई होगी।*
*कसूर क्या था शायद कोई खता नही थी,*
*कलेजा नही फटा जब वो चिल्लाई होगी।*
*तुम इतने बेरहम कैसे हो दरिंदो,*
*सोचता हूं तालीम ऐसी पायी होगी।*
Justic for *Aasifa*

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